रचना चोरों की शामत

Monday, 5 June 2017

बेटी का हक़ अगर

प्यारी बिटिया के लिए चित्र परिणाम
बेटी का हक, अगर आपने छीना तो
बुरा हाल हे मनुज! तुम्हारा होगा, तो

देर न होगी, बाँझ धरा के होने में
जीव-जन्म का, अगर सिलसिला टूटा तो

प्रलय-पृष्ठ पर करने होंगे हस्ताक्षर
सृष्टि-चक्र को अगर अँगुष्ठ दिखाया तो
 
समाधिस्थ होना तय है हर जीवन का
समाधान यदि आज ही नहीं सोचा तो

नाश वरण कर लेगा, इस सुंदर जग का 
अनजन्मी बेटी का मरण न रोका तो

कलियुग एक, कथा बनकर रह जाएगा
सार-कथ्य का नहीं कल्पनासमझा तो 

- कल्पना रामानी

3 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरूवार (08-06-2017) को
"सच के साथ परेशानी है" (चर्चा अंक-2642)
पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

Onkar said...

सार्थक रचना

ज्योति-कलश said...

सुन्दर भावधारा !

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