रचना चोरों की शामत

Wednesday, 29 May 2013

उनका खत आज डाकिया लाया//गजल//

















उनका ख़त आज डाकिया लाया।
फिर से भूला, हुआ पता लाया।
 
बाद मुद्दत के गुल खिला आँगन
और सावन, घनी घटा लाया।
 
चाँद मुझको दिखा अमावस में
चाँदनी को भी सँग लिवा लाया।
 
रंग बिखरे युवा उमंगों के
तंग मौसम, नई हवा लाया।

फिर मिलेंगे, वे कह गए थे मुझे 
दिल का दरिया अगर बहा लाया। 
 
मेरा हर शेर गूँजकर शायद
उनको इक बार फिर बुला लाया।
 
दर्द इतना कभी न था दिल में
दिल कहाँ से ये कल्पना लाया। 
  
-कल्पना रामानी

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