डाल-डाल पर जब लद जाते, फूल सलोने गुलाब के
स्वप्न गुलाबी हमें दिखाते, फूल सलोने गुलाब के
रस-सुगंध, सौन्दर्य-स्वामी
ये, हर लेते हर जन का मन
जब डालों पर खिल लहराते, फूल सलोने गुलाब के
ऋतु बसंत में हरिक बाग ज्यों, बन जाता है रंगमहल
बागों के राजा कहलाते, फूल सलोने गुलाब के
देख धूप के तेवर इनका, रूप
निखर जाता है और
सुर्ख-सूर्य से आँख मिलाते, फूल सलोने गुलाब के
हर मुश्किल को मीत बना लो, देते हमको सीख यही
काँटों से भी प्रीत निभाते, फूल सलोने गुलाब के
अलग-अलग ऋतु में आ मिलते, इनसे जब बिछड़े साथी
हँसकर उनको गले लगाते, फूल
सलोने गुलाब के
थोड़ा सा दें स्थान 'कल्पना', इनको अपने आँगन में
रंग-सुरभि से घर महकाते, फूल सलोने गुलाब के
-कल्पना रामानी
