रचना चोरों की शामत

मेरे बारे में

मेरे बारे में
कल्पना रामानी
Showing posts with label प्यारी बिटिया. Show all posts
Showing posts with label प्यारी बिटिया. Show all posts

Monday, 5 June 2017

भोली बिटिया

प्यारी बिटिया के लिए चित्र परिणाम
मेरी प्यारी भोली बिटिया। 
घर भर की हमजोली बिटिया। 

चहक चमन की, महक सदन की
कोयलिया की बोली बिटिया।

पर्वों को जीवंत बनाती
आँगन सजा रँगोली बिटिया।

लँगड़ी, टप्पा, खो-खो, रस्सी
खेल-खेल की टोली बिटिया।

गली-मुहल्ले बाँटा करती
झर-झर हँसी-ठिठोली बिटिया।

देव-दैव्य से माँग दुआएँ
ले आती भर झोली बिटिया।

कड़ुवाहट का नाम न लेती
खट-मिट्ठी सी गोली बिटिया।

नाज़ कल्पनाहर उस घर को
जिस घर माँ! पा! बोली बिटिया। 

- कल्पना रामानी

बेटी बचाएँ

 संबंधित चित्र
ज़मीं से उठाकर फ़लक पर बिठाएँ। 
अहम लक्ष्य हो, आज बेटी बचाएँ।

जहाँ घर-चमन में, चहकती है बेटी
बहा करतीं उस घर, महकती हवाएँ।

क़तल बेटियाँ कर, जनम से ही पहले
धरा को न खुद ही, रसातल दिखाएँ।  

बहन-बेटी होती सदा पूजिता है
सपूतों को अपने, सबक यह सिखाएँ। 

पढ़ाती जो सद्भाव का पाठ जग को
उसे बंधु! बेटे बराबर पढ़ाएँ।

न हो जननियों, अब सुता-भ्रूण हत्या
वचन देके खुद को अडिग हो निभाएँ।   

है सच कल्पनाबेटी बेटों से बढ़कर
कि अब भेद का भूत, भव से भगाएँ। 

- कल्पना रामानी

इस जनम में अब नहीं

 प्यारी बिटिया के लिए चित्र परिणाम
इस जनम में अब नहीं अपमान अपना मैं सहूँगी।
पीर से वर माँग, अपनी गोद, बेटी से भरूँगी।

कस शिकंजा ज़ालिमों के कत्ल का ऐलान होगा
लाड़ली! लेकिन तुम्हें क़ातिल हवा लगने न दूँगी

सुन जिसे पापी-पतित पछताएँ, अपना पीट लें सिर
लेखनी में भर लहू, ऐसी गज़ल हर दिन कहूँगी।

दामिनी’ ‘निर्भयाभयमुक्त हों ज्यों दानवों से 
सिर उठा, संकल्प कर, कानून वो लागू करूँगी। 

चाहे क्यों ना काल मुझको ही गले अपने लगा ले
कल्पनापर मौत, बेटी! गर्भ में तुमको न दूँगी। 

- कल्पना रामानी

धरती हुई निहाल

संबंधित चित्र
धरती हुई निहाल, बधाई दी अंबर ने। 
जब हर नारी लगी गोद बेटी से भरने।

कन्या भ्रूण विसर्जित होने कभी न देगी
कृत संकल्प हुई जननी, अब रक्षित करने।

क्रूर-काल ने भी ठाना है, आएगा वो
प्राण पुत्रियों के न जन्म से पहले हरने।

गज़लें करने लगीं बेटियों पर ही शायरी
कलम चली बिटिया को कविता अर्पित करने

किया समर्थन समंदरों ने, ज्वार बढ़ाकर 
नदियों ने दी ताल, गा उठे पर्वत-झरने

देख हवा के बदले रुख को, विस्मित होकर  
झुका लिया है सिर नारी के, आगे नर ने  

मानो रे इंसान! बाँझ है भू, बेटी बिन
रची कल्पनासृष्टि सोचकर ही ईश्वर ने  

- कल्पना रामानी

बेटी का हक़ अगर

प्यारी बिटिया के लिए चित्र परिणाम
बेटी का हक, अगर आपने छीना तो
बुरा हाल हे मनुज! तुम्हारा होगा, तो

देर न होगी, बाँझ धरा के होने में
जीव-जन्म का, अगर सिलसिला टूटा तो

प्रलय-पृष्ठ पर करने होंगे हस्ताक्षर
सृष्टि-चक्र को अगर अँगुष्ठ दिखाया तो
 
समाधिस्थ होना तय है हर जीवन का
समाधान यदि आज ही नहीं सोचा तो

नाश वरण कर लेगा, इस सुंदर जग का 
अनजन्मी बेटी का मरण न रोका तो

कलियुग एक, कथा बनकर रह जाएगा
सार-कथ्य का नहीं कल्पनासमझा तो 

- कल्पना रामानी

Wednesday, 18 May 2016

बेटियों पर चर्चा हो

 
अगर कहीं भी बंधु, चिरागों चर्चा पर हो
भव-भूतल के बिसरे कोनों पर चर्चा हो

व्यर्थ विलाप, निराशा, रुदन, विसर्जित करके 
लक्ष्य-साधना, कर्म, हौसलों पर चर्चा हो

सुमन सभी, खुश-रंग सुरभि, देते बगिया को
नहीं ज़रूरी, सिर्फ गुलाबों पर चर्चा हो

नाम हमारा भव में, चर्चित हो न हो मगर
चाह, कलम केअमृत-भावों पर चर्चा हो

सार जहाँ हो, ज्ञान-सिंधु की बूँद-बूँद में
ऐसी सरल, सुभाष्य किताबों पर चर्चा हो

छोड़ो भी, अब नीरस जीवन का नित रोना
रसमय, गीत, ग़ज़ल, कविताओं पर चर्चा हो

बेदम हो जब भूख, रोटियाँ घर-घर पहुँचें
तभी आसमाँ, चाँद-सितारों पर चर्चा हो

सदी कह रही सुनो कल्पनासमय आ गया
बेटों से रुख मोड़, बेटियों पर चर्चा हो   

-कल्पना रामानी  

Tuesday, 12 April 2016

आज की बेटी

नई सदी की हवा बंधुओं ऐसी होगी
बेटों से भी धनी आज की बेटी होगी।

मिटा माथ से अब अपने अबलाका लेबल
दुर्गा, काली, या झाँसी की रानीहोगी।

अब अधिकार नहीं होगा मर्दों का केवल 
कुर्सी पर काबिज हक़ से नारी भी होगी।

बोलेंगे हड़ताल अनशन बेटी के हक़ में
समाचार-पत्रों पर बिटियाछाई होगी।

कुत्सित नज़रें छू भी लें अगर, बिटिया को तो   
उन नज़रों को अपनी आब गँवानी होगी।

करने समर्पित, बेटी को यह सदी कल्पना
नित्य कलम को नूतन ग़ज़ल रचानी होगी। 

-कल्पना रामानी

Friday, 25 March 2016

रानी बिटिया

नई सदी लिक्खेगी शक्त कहानी, ‘बिटिया। 
राज करेगी युगों युगों तक, प्यारी बिटिया।

नयन-नेह से उसके, महकेगा हर आँगन
चाहेंगे अपने घर में सब, रानी बिटिया।
   
पुरस्कार, सम्मान चरण चूमेंगे आकर 
अंबर का ध्रुव तारा बन, चमकेगी बिटिया।

गर्वित होंगे पालक, सुन उसकी यश-गाथा
शीश उठाकर कहा करेंगे मेरी बिटिया

दाम बढ़ा लेंगे निज, तब कागज़-स्याही, जब
काव्य-ग्रंथ-पृष्ठों में छाई होगी, ‘बिटिया

गीत-छंद बेटी का ही गुणगान करेंगे
गज़लों को भी देगी नव्य रवानी, ‘बिटिया। 

कहनी इतनी बात, सुता होगी घर-घर में
और 'कल्पना' हर नारी चाहेगी, ‘बिटिया। 

-कल्पना रामानी 

Wednesday, 16 April 2014

बेटियाँ होंगी न जब

चित्र से काव्य तक

गर्भ में ही काटकर, अपनी सुता की नाल माँ!
दुग्ध-भीगा शुभ्र आँचल, मत करो यूँ लाल माँ!
 
तुम दया, ममता की देवी, तुम दुआ संतान की,
जन्म दो जननी! न बनना, ढोंगियों की ढाल माँ!
 
मैं तो हूँ बुलबुल तुम्हारे, प्रेम के ही बाग की,
चाहती हूँ एक छोटी सी सुरक्षित डाल माँ!
 
पुत्र की चाहत में तुम अपमान निज करती हो क्यों?
धारिणी, जागो! समझ लो भेड़ियों की चाल माँ!
 
सिर उठाएँ जो असुर, उनको सिखाना वो सबक,
भूल जाएँ कंस कातिल, आसुरी सुर ताल माँ!
 
तुम सबल हो, आज यह साबित करो नव-शक्ति बन,
कर न पाएँ कापुरुष, ज्यों मेरा बाँका बाल माँ!
 
ठान लेना जीतनी है, जंग ये हर हाल में                 
खंग बनकर काट देना, हार का हर जाल माँ!
 
तान चलना माथ, नन्हाँ हाथ मेरा थामकर,
दर्प से दमका करे ज्यों, भारती का भाल माँ!
 
कल्पनाअंजाम सोचो, बेटियाँ होंगी न जब,
रूप कितना सृष्टि का, हो जाएगा विकराल माँ!


-----कल्पना रामानी  

Sunday, 6 April 2014

बेटियों आगे बढ़ो

  
हक़ से हर अधिकार पाने, बेटियों आगे बढ़ो।
स्वप्न पूरे कर दिखाने, बेटियों आगे बढ़ो।

चाहे मावस रात हो, जुगनू सितारे हों न हों
ज्योत बनकर जगमगाने, बेटियों आगे बढ़ो।

सिर तुम्हारा ना झुके, अन्याय के आगे कभी
न्याय का डंका बजाने, बेटियों आगे बढ़ो।

ज्ञान के विस्तृत फ़लक पर, करके अपने दस्तखत
विश्व में सम्मान पाने, बेटियों आगे बढ़ो।

तुम सबल हो, बाँध लो यह बात अपनी गाँठ में
क्यों सुनो अबला का ताने, बेटियों आगे बढ़ो।

रूढ़ियों की रीढ़ तोड़ो, बेड़ियाँ सब काट कर
दिलजलों के बुत जलाने, बेटियों आगे बढ़ो।

देखना सरकें नहीं वे, सर्प जो तुमको डसें
विषधरों को विष पिलाने, बेटियों आगे बढ़ो।

सीख लो गुर निज सुरक्षा के, सदा रहना सजग
दंभ को दर्पण दिखाने, बेटियों आगे बढ़ो।

गर्भ में ही फिर तुम्हारा, अंश ना हो अस्तमित
“कल्पना” खुद को बचाने, बेटियों आगे बढ़ो। 

-कल्पना रामानी  

समर्थक

सम्मान पत्र

सम्मान पत्र