
मेरी प्यारी भोली बिटिया।
घर भर की हमजोली बिटिया।
चहक चमन की, महक सदन की
कोयलिया की बोली बिटिया।
पर्वों को जीवंत बनाती
आँगन सजा रँगोली बिटिया।
लँगड़ी, टप्पा, खो-खो, रस्सी
खेल-खेल की टोली बिटिया।
गली-मुहल्ले बाँटा करती
झर-झर हँसी-ठिठोली बिटिया।
देव-दैव्य से माँग दुआएँ
ले आती भर झोली बिटिया।
कड़ुवाहट का नाम न लेती
खट-मिट्ठी सी गोली बिटिया।
नाज़ ‘कल्पना’ हर उस घर को
जिस घर माँ! पा! बोली बिटिया।
- कल्पना रामानी



