रचना चोरों की शामत

मेरी ई बुक-ग़ज़ल संग्रह

Saturday, 16 February 2013

धुन उमंगों की कहे जो...




















धुन उमंगों की कहे, वो गीत गढ़ना चाहिए।
मन तरंगों में बहे, वो साज चुनना चाहिए।
 

सृष्टि के विस्तीर्ण इस, सुंदर सलोने पटल पर,
मुग्ध मन से कल्पना का रंग भरना चाहिए।  
 
खल मुखौटों की बहकती, भीड़ में शामिल न हों,
सद विचारों से नया, इतिहास रचना चाहिए।

जिसने मन से विश्व के हर, जीव का कण-कण रचा,
उस रचयिता का सदा, आभार कहना चाहिए।
 
फूल औ काँटे सदा, रहते हैं ज्यों इक डाल पर,
उस तरह हर दोष गुण, स्वीकार करना चाहिए।
 
मन में जिसके बस गई हो, बन सखी सुंदर गजल,
संग मिलकर काव्य का, संसार बुनना चाहिए।
 
मीत यह मानुष जनम, हमको नसीबों से मिला,
ज़िंदगी के हरिक पल से, प्यार करना चाहिए।

---कल्पना रामानी

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